BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक भी बेहद अहम रही। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद, व्यापारिक असंतुलन और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की आमने-सामने बातचीत को कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया।
बैठक में दोनों देशों के संबंधों को स्थिर बनाने, मतभेदों को विवाद में बदलने से रोकने और आपसी संवाद जारी रखने पर जोर दिया गया। भारत के लिए चीन के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि दोनों देश व्यापार, विनिर्माण और क्षेत्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
हालांकि, इस मुलाकात को संबंधों में सुधार की दिशा में एक कदम माना जा सकता है, लेकिन सीमा विवाद और व्यापार से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान अभी भी आगे की बातचीत पर निर्भर करेगा।
ईरान के साथ ऊर्जा और क्षेत्रीय सुरक्षा पर बातचीत
प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की। पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए यह मुलाकात काफी महत्वपूर्ण रही। क्षेत्र में जारी तनाव का असर ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। भारत और ईरान के बीच ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क से जुड़े पुराने संबंध हैं। दोनों देशों के लिए सुरक्षित व्यापारिक मार्ग, क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग महत्वपूर्ण विषय हैं।

बैठक के दौरान क्षेत्रीय शांति और सहयोग को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। भारत का रुख लगातार यह रहा है कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए।
अन्य देशों के नेताओं से भी हुई अहम बातचीत
प्रधानमंत्री मोदी की द्विपक्षीय बैठकों का दायरा केवल रूस, चीन और ईरान तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अफ्रीका, मध्य एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों के नेताओं के साथ भी बातचीत की। इन मुलाकातों में व्यापार, निवेश, डिजिटल बुनियादी ढांचे, महत्वपूर्ण खनिजों, तकनीक और विकास सहयोग जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया गया। भारत इन क्षेत्रों के देशों के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को लगातार मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
विकासशील देशों के साथ सहयोग बढ़ाना भारत की विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में BRICS Summit के दौरान हुई ये बैठकें भारत के लिए नए व्यापारिक अवसर और साझेदारी के रास्ते खोल सकती हैं।
BRICS में व्यापार और आर्थिक सहयोग पर जोर
BRICS देशों के बीच आर्थिक सहयोग सम्मेलन का एक प्रमुख विषय रहा। वैश्विक व्यापार में बढ़ती अनिश्चितता, आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट और संरक्षणवादी नीतियों के बीच सदस्य देशों के लिए आपसी व्यापार को आसान बनाना महत्वपूर्ण है। भारत ने व्यापारिक सहयोग बढ़ाने, निवेश के नए अवसर तलाशने और वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में विकासशील देशों की भूमिका मजबूत करने पर जोर दिया। स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और सीमा-पार भुगतान प्रणालियों को बेहतर बनाने जैसे विषय भी BRICS के आर्थिक एजेंडे का हिस्सा रहे।
हालांकि, अलग-अलग देशों की आर्थिक नीतियों और हितों में अंतर होने के कारण इन पहलों को लागू करना आसान नहीं होगा। इसके लिए सदस्य देशों के बीच लंबे समय तक सहयोग और ठोस सहमति की आवश्यकता होगी।
रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा क्यों हैं महत्वपूर्ण मुद्दे?
भारत के लिए रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा दोनों ही रणनीतिक प्राथमिकताएं हैं। रूस के साथ रक्षा सहयोग और ऊर्जा संबंधों का लंबा इतिहास रहा है। वहीं, पश्चिम एशिया में तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री परिवहन पर असर पड़ने की आशंका बनी रहती है।
BRICS के मंच पर इन मुद्दों पर बातचीत से भारत को अपने साझेदार देशों के साथ सहयोग बढ़ाने का अवसर मिलता है। ऊर्जा के क्षेत्र में स्थिर आपूर्ति, तकनीकी सहयोग और वैकल्पिक व्यापारिक मार्गों पर ध्यान देना भारत की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
रक्षा क्षेत्र में भी भारत विभिन्न देशों के साथ तकनीक, उपकरण, उत्पादन और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। हालांकि, किसी भी बैठक के बाद ठोस रक्षा समझौते या नए सौदों की पुष्टि तभी मानी जानी चाहिए, जब उनकी आधिकारिक घोषणा हो।
BRICS Summit में भारत के लिए क्या रहा खास?
| प्रमुख मुद्दा | जानकारी |
|---|---|
| सम्मेलन | 18वां BRICS शिखर सम्मेलन |
| आयोजन स्थल | नई दिल्ली, भारत |
| भारत की भूमिका | 2026 में BRICS की अध्यक्षता |
| प्रधानमंत्री मोदी की बैठकें | 15 औपचारिक द्विपक्षीय मुलाकातें |
| प्रमुख साझेदार | रूस, चीन, ईरान समेत अन्य देश |
| चर्चा के विषय | व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, निवेश और क्षेत्रीय सुरक्षा |
| प्रमुख उद्देश्य | आर्थिक सहयोग और वैश्विक कूटनीति को मजबूत करना |
वैश्विक चुनौतियों पर भी रहा ध्यान
BRICS Summit ऐसे समय में आयोजित हुआ, जब दुनिया के कई हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा संकट और व्यापारिक अस्थिरता जैसी चुनौतियां मौजूद हैं। इन परिस्थितियों में सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य रहा।
प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए संवाद, सहयोग और व्यावहारिक कदमों की आवश्यकता पर जोर दिया। खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, तकनीक और आपूर्ति श्रृंखला जैसे विषय भी BRICS के व्यापक एजेंडे का हिस्सा रहे।

18वें BRICS शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 15 द्विपक्षीय बैठकें भारत की सक्रिय कूटनीतिक भूमिका को दर्शाती हैं। रूस, चीन, ईरान और अन्य देशों के साथ बातचीत के जरिए भारत ने व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने संबंधों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।
इन बैठकों के वास्तविक परिणाम आने वाले समय में व्यापारिक समझौतों, रणनीतिक सहयोग और क्षेत्रीय कूटनीति के स्तर पर दिखाई दे सकते हैं। BRICS के माध्यम से भारत वैश्विक सहयोग और विकासशील देशों की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
FAQ
1. 18वां BRICS Summit कहां आयोजित हुआ?
18वां BRICS शिखर सम्मेलन नई दिल्ली, भारत में आयोजित हुआ।
2. BRICS Summit में प्रधानमंत्री मोदी ने कितनी द्विपक्षीय बैठकें कीं?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के दौरान 15 औपचारिक द्विपक्षीय बैठकें कीं।
3. पीएम मोदी की प्रमुख मुलाकातें किन नेताओं से हुईं?
प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई नेताओं से मुलाकात की।
4. BRICS Summit में किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
बैठकों में व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, निवेश, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक सहयोग जैसे मुद्दे शामिल रहे।
5. BRICS का पूरा नाम क्या है?
BRICS का अर्थ Brazil, Russia, India, China and South Africa है। संगठन का विस्तार होने के बाद इसमें कई अन्य देश भी शामिल हो चुके हैं।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी उपलब्ध समाचार रिपोर्टों और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। अंतरराष्ट्रीय बैठकों के परिणाम और नीतिगत फैसले समय के साथ बदल सकते हैं। किसी भी महत्वपूर्ण जानकारी के लिए संबंधित आधिकारिक स्रोतों की पुष्टि करें।
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