BRICS Summit 2026: आखिरी दिन PM मोदी की कूटनीतिक हलचल, 4 देशों के नेताओं से मुलाकात पर दुनिया की नजर

Published On: September 13, 2026
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BRICS Summit 2026 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव के साथ प्रस्तावित बैठक मध्य एशिया के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।

कजाकिस्तान मध्य एशिया का एक प्रमुख देश है और ऊर्जा, खनिज संसाधनों तथा क्षेत्रीय संपर्क के क्षेत्र में इसकी अहम भूमिका है। भारत और कजाकिस्तान के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग के संबंध पहले से मौजूद हैं।

दोनों देशों के बीच बातचीत में इन संबंधों को और व्यापक बनाने पर जोर दिया जा सकता है। इसके अलावा, मध्य एशिया तक भारत की पहुंच बेहतर बनाने और परिवहन मार्गों को मजबूत करने जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

भारत के लिए मध्य एशिया केवल आर्थिक साझेदारी का क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह रणनीतिक दृष्टि से भी काफी अहम है। इस क्षेत्र में स्थिरता, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और ऊर्जा संसाधनों तक पहुंच भारत के दीर्घकालिक हितों से जुड़े विषय हैं।

BRICS Summit 2026 Feature Box

Feature Category Details (Expected)
सम्मेलन 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन
मेजबान देश भारत
आयोजन स्थल भारत मंडपम, नई दिल्ली
सम्मेलन की तारीख 12 और 13 सितंबर 2026
अध्यक्षता भारत
मुख्य आकर्षण प्रधानमंत्री मोदी की द्विपक्षीय बैठकें
प्रमुख बैठकें कजाकिस्तान, फिलीपींस, मिस्र और दक्षिण अफ्रीका
मुख्य विषय आर्थिक सहयोग, नवाचार, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक शासन
प्रमुख उद्देश्य विकासशील देशों के सहयोग को मजबूत करना
संभावित निष्कर्ष नई दिल्ली घोषणापत्र और साझा प्राथमिकताएं

फिलीपींस के राष्ट्रपति से बातचीत पर रहेगी नजर

प्रधानमंत्री मोदी की फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर के साथ बैठक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की सक्रिय भूमिका को दर्शा सकती है। फिलीपींस दक्षिण-पूर्व एशिया का एक महत्वपूर्ण देश है और समुद्री सुरक्षा तथा क्षेत्रीय स्थिरता के मामलों में इसकी भूमिका बढ़ी है।

भारत और फिलीपींस के संबंधों में रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, डिजिटल तकनीक और शिक्षा जैसे क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं। दोनों देशों के बीच बातचीत में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र, खुले और नियम आधारित व्यवस्था को मजबूत करने पर चर्चा हो सकती है।

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भारत की एक्ट ईस्ट नीति के तहत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ संबंधों को मजबूत करना प्रमुख प्राथमिकता रही है। फिलीपींस के साथ बेहतर सहयोग से भारत को क्षेत्रीय संपर्क, समुद्री व्यापार और रणनीतिक साझेदारी के क्षेत्र में लाभ मिल सकता है।

फिलीपींस के साथ संबंधों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि दोनों देश समुद्री क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की यह बैठक आर्थिक और सुरक्षा दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण हो सकती है।

मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी से मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी के साथ बैठक भारत और मिस्र के बीच बढ़ते संबंधों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मिस्र अफ्रीका और पश्चिम एशिया के बीच एक प्रमुख भौगोलिक और रणनीतिक स्थान रखता है।

भारत और मिस्र के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग के क्षेत्र में संबंध हैं। दोनों देशों के बीच बातचीत में आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा देने और व्यापार के नए अवसर तलाशने पर जोर दिया जा सकता है।

मिस्र की स्थिति स्वेज नहर के कारण भी महत्वपूर्ण है। यह मार्ग अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए बेहद अहम है। वैश्विक आपूर्ति शृंखला, समुद्री परिवहन और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भारत और मिस्र के बीच सहयोग उपयोगी हो सकता है।

इसके अलावा, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अफ्रीकी देशों के साथ सहयोग जैसे विषय भी व्यापक क्षेत्रीय संदर्भ में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि, बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा होगी और क्या निर्णय लिए जाएंगे, इसकी पुष्टि आधिकारिक बयान के बाद ही होगी।

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति से होगी अहम बातचीत

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के साथ प्रधानमंत्री मोदी की बैठक ब्रिक्स के भीतर भारत और दक्षिण अफ्रीका के सहयोग के लिए विशेष महत्व रखती है। दोनों देश विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक मंच पर मजबूत करने और बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं। भारत और दक्षिण अफ्रीका के संबंध व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और औद्योगिक सहयोग तक फैले हुए हैं। दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की संभावनाएं मौजूद हैं।

दक्षिण अफ्रीका अफ्रीकी महाद्वीप की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। भारत के लिए अफ्रीका के साथ संबंधों को मजबूत करना आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।

दक्षिण अफ्रीका के साथ बेहतर साझेदारी से भारत को अफ्रीकी बाजारों और क्षेत्रीय सहयोग के नए अवसर मिल सकते हैं। बैठक में ब्रिक्स के भविष्य, वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं, संयुक्त राष्ट्र में सुधार और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श की संभावना है।

BRICS Summit 2026 में आर्थिक सहयोग पर जोर

ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक सहयोग सम्मेलन का एक प्रमुख विषय है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में व्यापारिक अनिश्चितता, आपूर्ति शृंखला में व्यवधान, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और निवेश से जुड़ी चुनौतियां कई देशों के लिए चिंता का विषय हैं।

ऐसे में ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार और निवेश को आसान बनाने के प्रयास महत्वपूर्ण हो सकते हैं। सदस्य देश स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, वित्तीय सहयोग और डिजिटल भुगतान व्यवस्था जैसे विषयों पर चर्चा कर सकते हैं।

भारत के लिए यह मंच निर्यात बढ़ाने, विदेशी निवेश आकर्षित करने और नई तकनीकी साझेदारियां विकसित करने का अवसर प्रदान करता है। छोटे और मध्यम उद्योगों, स्टार्टअप, डिजिटल अर्थव्यवस्था तथा विनिर्माण क्षेत्र में सहयोग से भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

हालांकि, ब्रिक्स देशों की आर्थिक नीतियां और राष्ट्रीय प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं। इसलिए किसी भी बड़े आर्थिक समझौते के लिए सभी देशों के बीच सहमति बनाना आवश्यक होगा।

डिजिटल तकनीक और स्टार्टअप सहयोग की संभावना

आज के समय में डिजिटल तकनीक आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। भारत ने डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, ऑनलाइन भुगतान, फिनटेक और स्टार्टअप के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।

ब्रिक्स सम्मेलन में डिजिटल अर्थव्यवस्था, तकनीकी नवाचार और स्टार्टअप सहयोग पर चर्चा भारत के लिए विशेष महत्व रखती है। सदस्य देशों के बीच तकनीकी अनुभव साझा करने और नए उद्यमों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच दिलाने की संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं।

भारत के डिजिटल भुगतान मॉडल और तकनीकी समाधान दूसरे विकासशील देशों के लिए उपयोगी हो सकते हैं। वहीं, ब्रिक्स के अन्य देशों के साथ सहयोग से भारतीय कंपनियों को नए बाजारों में प्रवेश करने का अवसर मिल सकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, डिजिटल वित्त और तकनीकी शिक्षा जैसे क्षेत्र भी आने वाले समय में आर्थिक सहयोग के महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं।

ऊर्जा सुरक्षा और टिकाऊ विकास पर भी नजर

ऊर्जा सुरक्षा भारत समेत दुनिया के कई देशों के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। वैश्विक स्तर पर तेल, गैस और अन्य ऊर्जा संसाधनों की कीमतों में बदलाव का सीधा असर आर्थिक विकास और महंगाई पर पड़ता है।

ब्रिक्स देशों के बीच ऊर्जा सहयोग बढ़ाने से ऊर्जा आपूर्ति को अधिक स्थिर बनाने और वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित तकनीक और ऊर्जा संक्रमण पर भी चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है।

भारत सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और स्वच्छ ऊर्जा तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। ब्रिक्स मंच पर इन क्षेत्रों में साझेदारी से निवेश और तकनीकी विकास के अवसर बढ़ सकते हैं।

टिकाऊ विकास का मुद्दा भी सम्मेलन के एजेंडे में महत्वपूर्ण है। विकासशील देशों के लिए आर्थिक वृद्धि के साथ पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा की उपलब्धता के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।

ग्लोबल साउथ के लिए भारत की भूमिका

भारत लंबे समय से विकासशील देशों की समस्याओं को वैश्विक मंच पर उठाने की कोशिश करता रहा है। ग्लोबल साउथ के देशों के सामने वित्तीय संसाधनों की कमी, तकनीकी असमानता, खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां हैं।

ब्रिक्स के माध्यम से भारत इन देशों के लिए बेहतर वित्तीय अवसर, तकनीकी सहयोग और विकास आधारित साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दे सकता है। वैश्विक संस्थानों में विकासशील देशों की अधिक भागीदारी का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है।

भारत की अध्यक्षता में होने वाला सम्मेलन इस बात का अवसर देता है कि विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं में अधिक प्रमुखता मिले। हालांकि, इन लक्ष्यों को वास्तविक नीतियों में बदलने के लिए सदस्य देशों के बीच निरंतर सहयोग आवश्यक होगा।

ब्रिक्स के विस्तार से बढ़ी जिम्मेदारियां

ब्रिक्स के विस्तार के बाद इस समूह में अलग-अलग क्षेत्रों और आर्थिक परिस्थितियों वाले देशों की भागीदारी बढ़ी है। इससे संगठन का वैश्विक प्रभाव बढ़ सकता है, लेकिन इसके साथ चुनौतियां भी सामने आती हैं।

सदस्य देशों के राजनीतिक हित, आर्थिक नीतियां और क्षेत्रीय प्राथमिकताएं अलग-अलग हो सकती हैं। ऐसे में साझा घोषणाओं और नीतिगत सहमति तक पहुंचना आसान नहीं होगा।

भारत के लिए चुनौती यह होगी कि वह अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ-साथ ब्रिक्स के व्यापक हितों के बीच संतुलन बनाए। यदि सदस्य देश व्यापार, वित्त, तकनीक और विकास के मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण विकसित कर पाते हैं, तो ब्रिक्स की भूमिका और मजबूत हो सकती है।

आखिरी दिन के कार्यक्रम में क्या-क्या होगा?

13 सितंबर 2026 को ब्रिक्स सम्मेलन के मुख्य सत्र में सदस्य देशों, साझेदार देशों और आमंत्रित प्रतिनिधियों की भागीदारी होगी। सम्मेलन का प्रमुख विषय लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास के माध्यम से समावेशी वैश्विक विकास से जुड़ा है। इसके बाद नेताओं के बीच विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श और सम्मेलन के निष्कर्षों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

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नई दिल्ली घोषणापत्र के जारी होने की भी उम्मीद है, हालांकि इसकी अंतिम सामग्री आधिकारिक रूप से जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। प्रधानमंत्री मोदी की द्विपक्षीय बैठकों का सिलसिला भी इस दिन महत्वपूर्ण रहेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कजाकिस्तान, फिलीपींस, मिस्र और दक्षिण अफ्रीका के नेताओं के साथ मुलाकातों के अलावा कुछ अन्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ भी बातचीत हो सकती है।

BRICS Summit 2026 FAQ

Q1. BRICS Summit 2026 का आयोजन कहां हो रहा है?

BRICS Summit 2026 का आयोजन नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में किया जा रहा है।

Q2. BRICS Summit 2026 का आखिरी दिन कब है?

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आखिरी दिन 13 सितंबर 2026 है।

Q3. PM मोदी की चार प्रमुख द्विपक्षीय बैठकें किन नेताओं के साथ हैं?

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी की कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव, फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के साथ बैठकें हैं।

Q4. BRICS Summit 2026 में किन मुद्दों पर चर्चा हो रही है?

सम्मेलन में व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल तकनीक, वैश्विक शासन, टिकाऊ विकास और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं पर चर्चा हो रही है।

Q5. भारत के लिए ब्रिक्स सम्मेलन क्यों महत्वपूर्ण है?

यह सम्मेलन भारत को आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने, विकासशील देशों की आवाज उठाने और वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका बढ़ाने का अवसर देता है।

Q6. BRICS Summit 2026 की आधिकारिक जानकारी कहां मिलेगी?

सम्मेलन से जुड़े आधिकारिक अपडेट के लिए भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और ब्रिक्स के आधिकारिक पोर्टल को देखा जा सकता है।

Disclaimer: यह लेख ब्रिक्स सम्मेलन के निर्धारित कार्यक्रम और उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। द्विपक्षीय बैठकों के समय, प्रतिभागियों और कार्यक्रम में बदलाव संभव है। किसी भी समझौते या निर्णय की अंतिम पुष्टि संबंधित आधिकारिक घोषणाओं के बाद ही मानी जानी चाहिए।

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Ayush

मेरा नाम Ayush है और मैं apnatimes.in के लिए लेखन करता हूँ। मुझे टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, ई-स्पोर्ट्स, एंटरटेनमेंट और लेटेस्ट न्यूज़ से जुड़े विषयों पर आर्टिकल लिखने का अनुभव है। मैं हमेशा आसान, स्पष्ट और भरोसेमंद भाषा में जानकारी देने की कोशिश करता हूँ, ताकि हर पाठक तक सही खबर और उपयोगी जानकारी पहुँच सके। डिजिटल मीडिया के लिए तथ्यात्मक और यूज़र-फ्रेंडली कंटेंट लिखना मेरी प्राथमिकता है।

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